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किसान आंदोलन के चलते दिल्ली-हरियाणा और यूपी के तकरीबन दर्जन भर बॉर्डर सील कर दिए गए

3 केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा समेत कई राज्यों के किसानों का धरना-प्रदर्शन 8वें दिन में प्रवेश कर गया है। वहीं, दिल्ली कूच करने जा रहे मध्य प्रदेश के किसानों ने शुक्रवार सुबह से एनएच 19 पर डेरा डाल दिया है,क्योंकि पलवल पुलिस ने केएमपी एक्सप्रेस से पहले किसानों को रोक लिया है। ट्रैेक्टर-ट्रॉली पर सवार सैकड़ों किसान हाइवे पर जमा हैं। वहीं, वाटर कैनन के साथ बैरिकेडिंगग कर पुलिस भी मौके पर मौजूद है। बृहस्पतिवार शाम से ही एनएच -19 पर किसान ठहरे हुए हैं। इस बीच सिंघु बॉर्डर से करीब एक किलोमीटर पहले पुलिस ने भारी संख्या में बैरिकेड लगा दिए हैं। ट्रकों में भर-भरकर बैरिकेड लाए जा रहे हैं। अभी दोनों ओर एक लाइन से ही यातायात का आवागमन हो रहा है। दिल्ली-फरीदाबाद बदरपुर बॉर्डर पर दिल्ली की तरफ से पुलिस ने बैरिकेडिंग और कंटीले तार भी लगाए हैं। पलवल की तरफ से सैकड़ों किसानों के आने की सूचना पर पुलिस हाई अलर्ट पर है।

वहीं, दिल्ली-हरियाणा और यूपी के तकरीबन दर्जन भर बॉर्डर सील हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को 8वें दिन लगातार दिल्ली-एनसीआर के वाहन चालकों को दिक्कत पेश आ रही है। दिल्ली-एनसीआर में आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग हैं, लेकिन यहां पर लगने वाला जाम लोगों को समस्या भी बढ़ा रहा है। इस बीच सिंघु बॉर्डर पर जमा किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने हमारा पक्ष सुनने में 7 महीने लगा दिए।

इससे पहले  किसान आंदोलन के सातवें दिन बृहस्पतिवार को भी दिल्ली से सटे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अधिकतर बॉर्डर बंद रहे। गाजियाबाद से दिल्ली की ओर आने वाले मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे को किसानों ने बृहस्पतिवार सुबह ही बंद कर दिया था, लेकिन मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस को नहीं रोका गया। वहीं, दिल्ली-यूपी गेट पर पहले से ही बड़ी संख्या में किसान जुटे हैं, इसलिए पुलिस ने इस रास्ते को बंद कर रखा है। सिंघु बॉर्डर बृहस्पतिवार से और औचंदी बॉर्डर सोमवार देर रात से सील हैं। सबोली, भोपुरा और अप्सरा बॉर्डर भी बंद कर दिया गया था। वहीं, सिंघु और टीकरी बॉर्डर के साथ नोएडा और गाजियाबाद बॉर्डर पर अब भी किसान डटे हुए हैं।

वहीं, कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ आंदोलन में जुटे सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर किसानों के बीच सियासी फसल काटने के मंसूबे के साथ राजनीतिक पार्टियां व नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में महीनों सड़क जाम करने वाले शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी पहुंच रहे हैं। ये सभी सिंघु बॉर्डर पर किसानों के मंच से अपने मंसूबे को अमलीजामा पहनाते दिखाई देते हैं।

ऐसे में आंदोलन में जुटे कई किसान इससे नाराज हैं। इनका कहना है कि अभी किसान का मुद्दा सवरेपरि है और हम सिर्फ उसी पर बात करना चाहते हैं। जो लोग हमारे साथ हैं वे सिर्फ और सिर्फ हमारी मांगों के बारे में बात करें तो बेहतर होगा।

किसान आंदोलन समाप्त होने के संकेत

वहीं, पिछले दो महीने से चल रहे किसान आंदोलन के जल्द ही समाप्त होने के संकेत हैं। विज्ञान भवन में गुरुवार को केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच चौथे दौर की लंबी वार्ता में पहली बार दोनों पक्षों के बीच विवादास्पद मुद्दों पर सहमति बनी है। केंद्र सरकार ने लचीला रुख अपनाते हुए किसान संगठनों की सभी प्रमुख मांगों पर विचार करने और आशंकाओं को दूर करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी जामा पहनाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। माना जा रहा है कि सरकार प्रस्तावित कानूनों में संशोधनों पर विचार करने को तैयार है। वार्ता के दौरान चिह्न्ति सभी प्रमुख मुद्दों पर दोनों पक्षों में शनिवार को फिर बैठक होगी, जिसमें निर्णायक फैसला हो सकता है। गुरुवार की बैठक में सरकार की ओर से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश उपस्थित रहे।

विज्ञान भवन में सात घंटे से ज्यादा समय तक चली चौथे दौर की बैठक के शुरुआती दो घंटे तनातनी वाले थे। किसान नेता अपनी बातों पर अड़ियल रुख अपनाए हुए थे। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि किसान नेताओं ने सरकारी चाय तक लेने से मना कर दिया। उन्होंने अपने साथ लाई चाय ही पी। हालांकि, ज्यों ही कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) पर चर्चा को लेकर सरकार के लचीले रुख का संकेत दिया, माहौल बदल गया। सरकार की तरफ से तीनों मंत्रियों ने जोर देकर कहा कि न सिर्फ एपीएमसी को मजबूत बनाया जाएगा, बल्कि उसके दायरे में ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाया जाएगा।

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