Uttarakhand

संस्कार, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का संगम बना श्री सत्य साईं समर कैंप

-दो दिवसीय निरूशुल्क शिविर में 60 बच्चों ने सीखे योग, ध्यान, भजन और नैतिक जीवन के संस्कार

देहरादून। श्री सत्य साईं सेवा संगठन, उत्तराखंड द्वारा दुर्गा मंदिर, गढ़ी कैंट, देहरादून में आयोजित दो दिवसीय निरूशुल्क मूल्यपरक समर कैंप का सोमवार को भक्तिमय वातावरण एवं उत्साहपूर्ण माहौल के बीच सफलतापूर्वक समापन हो गया। 8 एवं 9 जून 2026 को आयोजित इस विशेष शिविर में 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 50 से 60 बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए नैतिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। शिविर का उद्देश्य बच्चों में चरित्र निर्माण, अनुशासन, आत्मविश्वास एवं सेवा भावना का विकास करना तथा उन्हें जिम्मेदार, संस्कारित और जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना था। प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 12रू30 बजे तक आयोजित विभिन्न सत्रों में बच्चों को योग, ध्यान, भजन-कीर्तन, गायन, नृत्य, आर्ट एंड क्राफ्ट, गाइडेड मेडिटेशन तथा मानवीय मूल्यों पर आधारित विविध गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। खेल-खेल में बच्चों ने सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा जैसे सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों को समझा और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
प्रदेश संयुक्त आध्यात्मिक समन्वयक बीना जोशी ने बच्चों को भजन, मंत्रोच्चार, योगाभ्यास एवं आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रशिक्षण देते हुए कहा कि बाल्यावस्था में प्राप्त संस्कार व्यक्ति के संपूर्ण जीवन की दिशा और दशा निर्धारित करते हैं। उन्होंने कहा कि श्री सत्य साईं बाबा की शिक्षाओं पर आधारित बाल विकास कार्यक्रम बच्चों में चरित्र निर्माण, आत्मबल और सेवा भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष अजय स्वरूप ने कहा कि बच्चे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन, श्रेष्ठ संस्कार और सकारात्मक वातावरण मिले तो वे भविष्य में समाज और राष्ट्र के आदर्श नागरिक बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को निखारने के साथ-साथ उनमें नेतृत्व क्षमता, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करते हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के सर्वांगीण विकास में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
शिविर के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत भजन, गायत्री मंत्र, भोजन मंत्र एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित अभिभावकों और श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। नन्हे प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सभी का मन मोह लिया। साथ ही उन्हें टीम भावना, सहयोग, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच के महत्व से भी अवगत कराया गया।
समापन समारोह में सभी प्रतिभागी बच्चों, अभिभावकों एवं श्रद्धालुओं को प्रसाद एवं भोजन वितरित किया गया। पूरे शिविर के दौरान वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और उत्साह से ओत-प्रोत रहा। कार्यक्रम की सफलता में संगठन के अनेक पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर चांद बल्लभ, दिनेश पाल, नीरज थापा, राजीव दुबे, रीता पंत, राधा वल्लभ, , सपना थापा, मीना छेत्री, अनीता पाल, , जय गुरुंग, कुसुम शर्मा, मंजू थापा एवं सुधा पून सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में अभिभावकों एवं श्रद्धालुओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

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