Uttarakhand

भरत के त्याग और भ्रातृप्रेम की लीला ने दर्शकों को किया भावविभोर, राम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटे भरत

-माता कैकेयी के वरदानों पर भरत ने जताया आक्रोश, राम-भरत मिलन के मंचन ने बांधा समां

-सरस्वती कला मंच की रामलीला में गूंजे राम-भरत मिलन के भावपूर्ण संवाद, भगवान राम के आदर्शों पर चलने का संदेश

विकासनगर। सरस्वती कला मंच की ओर से आयोजित रामलीला में भरत का ननिहाल से अयोध्या आगमन, कैकेयी-भरत संवाद, कौशल्या-भरत संवाद और राम-भरत मिलन की भावपूर्ण लीलाओं का मंचन किया गया। कलाकारों ने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों के माध्यम से भरत के त्याग, भ्रातृप्रेम तथा भगवान राम के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को जीवंत कर दिया। लीला के दौरान दर्शक भावविभोर नजर आए।

लीला के प्रथम दृश्य में भरत अपने राजमहल में विश्राम कर रहे होते हैं। इसी दौरान उन्हें स्वप्न में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन का दृश्य दिखाई देता है। दोबारा वही स्वप्न आने पर भरत विचलित हो उठते हैं। शत्रुघ्न उन्हें समझाते हैं कि स्वप्न हमेशा सच नहीं होते, लेकिन भरत के मन में किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है। इसी बीच उनके मामा उन्हें अयोध्या से संदेश आने और गुरु वशिष्ठ द्वारा बुलाए जाने की सूचना देते हैं। इसके बाद भरत अयोध्या के लिए रवाना हो जाते हैं।

अयोध्या पहुंचने पर भरत अपनी माता कैकेयी से भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और महाराज दशरथ के बारे में पूछते हैं। कैकेयी उन्हें बताती हैं कि उन्होंने अपने दो वरदानों के माध्यम से भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा था। यह सुनकर भरत क्रोधित और दुखी हो जाते हैं। वह अपनी माता के निर्णय पर कड़ा विरोध जताते हुए कहते हैं कि जिस राज्य के लिए उनके प्रिय भाई राम को वनवास जाना पड़ा, ऐसा राज्य उन्हें स्वीकार नहीं है।

इसके बाद भरत माता कौशल्या से मिलकर उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में उनका कोई दोष नहीं है। भगवान राम को वापस अयोध्या लाने के संकल्प के साथ वह वन की ओर प्रस्थान करते हैं।

चित्रकूट पर्वत पर भरत और भगवान राम का मिलन लीला का सबसे भावुक प्रसंग रहा। भरत भगवान राम से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं, लेकिन पिता को दिए वचन और उनकी आज्ञा का पालन करने के लिए राम वनवास पूरा करने पर अडिग रहते हैं। अंततः भरत उनसे उनकी चरण पादुकाएं मांगते हैं। राम की चरण पादुकाएं लेकर भरत अयोध्या लौटते हैं और उन्हें सिंहासन पर विराजमान कर राज्य का संचालन करते हैं। स्वयं तपस्वी के समान जीवन व्यतीत करने का संकल्प लेते हैं। इसी भावपूर्ण प्रसंग के साथ लीला का समापन हुआ।

कार्यक्रम का उद्घाटन नगर पालिका परिषद के सभासद भारत कालरा ने किया। उन्होंने कहा कि सभी को भगवान राम के आदर्शों और उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन में त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और पारिवारिक संबंधों के महत्व को समझने का माध्यम भी है।

इस अवसर पर नवनीत वर्मा, विकास शर्मा, रविंद्र सैनी, सियाराम पटेल, राकेश गुलरिया, अमरीश ठाकुर, संजीव भारद्वाज, प्रदीप ठाकुर, लक्ष्मी कोठियाल, संजय धीमान, संजय कुमार, अभिषेक रोहिल्ला, राजकुमार, गोपाल गुप्ता, शाश्वत कपिल और नोनू राणा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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