Uttarakhand

नगर पंचायत, सतपुली अध्यक्ष के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस, वित्तीय, प्रशासनिक अधिकारों पर लगी रोक

पौड़ी: सतपुली (पौड़ी) नगर पंचायत, सतपुली, पौड़ी गढ़वाल में विभिन्न कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत के संबंध में शासन ने बड़ी कार्यवाही की है। नगर पंचायत, सतपुली निवासी रविन्द्र रावत व शशांक घिल्डियाल की संयुक्त शिकायत के आधार पर शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी, पौड़ी गढ़वाल द्वारा करायी गयी जांच में प्रथमदृष्टया वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है।

जांच आख्या के आधार पर शासन द्वारा अध्यक्ष, नगर पंचायत सतपुली जितेन्द्र सिंह चौहान के विरुद्ध नगर पालिका अधिनियम, 1916 (उत्तराखण्ड में यथा-प्रवृत्त) की धारा 48 (2) (क) व (ख) के अंतर्गत कार्यालय ज्ञाप संख्या-443380/2026 दिनांक 23.10.2026 द्वारा कारण बताओ नोटिस निर्गत किया गया है।

जिलाधिकारी की जांच में अध्यक्ष, नगर पंचायत सतपुली जितेन्द्र सिंह चौहान के विरुद्ध आरोप है कि उन्होंने ₹3,71,852 की निर्मित टैक्सी पार्किंग को बिना तकनीकी स्वीकृति व निविदा के ध्वस्तीकरण किया। इसके अलावा पार्किंग ठेके की दर को ₹16,000 से घटाकर ₹8200 करना, जिससे निकाय को हानि और महर्षि बाल्मिकी ट्रस्ट को बिना शासनादेश के ₹50,000 जारी करना। कुंज नयार घाटी मेले में टेंट-साउंड के कार्य का कृत्रिम विखंडन कर लगभग ₹9.63 लाख की अनियमितता। दुकानों का अवैध व नियम विरुद्ध आवंटन। वाहनों के किराये के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग। निकाय के वाहन हेतु स्वयं/स्वजन के पेट्रोल पंप को भुगतान। यश टेंट हाउस को एक ही चेक नंबर 000204 से कई लेन-देन- गंभीर वित्तीय अनियमितता। आवारा पशुओं/बंदरों के नाम पर ₹46,800 में से ₹38,400 का बिना बिल-बाउचर के स्वयं के खाते में आहरण और पूर्व बकाया वसूली के बिना पार्किंग का नियम विरुद्ध पुनः आवंटन। उनके इन कार्यों को अधिप्राप्ति नियमावली 2017/2025, GFR-157 एवं शासनादेश दिनांक 26.11.2024 का उल्लंघन मानते हुए श्री चौहान को प्रथमदृष्टया उत्तरदायी माना गया है।

धारा 48(2)(ख) के परन्तुक के अनुसार कारण बताओ नोटिस जारी होने की तिथि 23.10.2026 से अध्यक्ष के समस्त वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेशों तक रोक लगा दी गयी है।

श्री राज्यपाल की स्वीकृति से जिलाधिकारी, पौड़ी गढ़वाल को अध्यक्ष के अधिकारों के निर्वहन हेतु प्राधिकृत किया गया है, जो डिप्टी कलेक्टर से अनिम्न श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी को नामित कर सकेंगे। अध्यक्ष को 15 दिन में लिखित अभिकथन प्रस्तुत करने, साक्षी प्रस्तुत करने व व्यक्तिगत सुनवाई हेतु अनुरोध करने का अवसर दिया गया है, अन्यथा पद से हटाने की विधिक कार्यवाही प्रारम्भ की जायेगी।

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