उत्तराखंड कौथिग में गढ़वाली गीतों की धूम, लोकगायकों ने बांधा समां, सौरभ मैठाणी, मंजू सुंदरियाल, गजेंद्र राणा, रेशमा शाह और बिशन हरियाला की प्रस्तुतियों पर झूमे दर्शक

देहरादून। अखिल गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित उत्तराखंड कौथिग में बुधवार को लोक संस्कृति, संगीत और जनसेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। रेंजर्स कॉलेज मैदान में आयोजित सांस्कृतिक गीत संध्या में प्रसिद्ध लोकगायकों ने गढ़वाली गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, दिन में आयोजित विद्यालयों की सामूहिक गढ़वाली गीत प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कौथिग स्थल पर आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 164 लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराकर लाभ उठाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ शाम छह बजे पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि अखिल गढ़वाल सभा उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सराहनीय कार्य कर रही है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं, भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर भारतीय जीवन बीमा निगम के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक पंत तथा भारतीय स्टेट बैंक के उपमहाप्रबंधक राजीव रंजन भी उपस्थित रहे।
इससे पूर्व सभा अध्यक्ष रोशन धस्माना और महासचिव गजेंद्र भंडारी ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कौथिग का उद्देश्य लोक संस्कृति को प्रोत्साहित करना और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाना है।
लोकगीतों पर झूमे दर्शक
गीत संध्या की शुरुआत प्रसिद्ध लोकगायक सौरभ मैठाणी ने भजन ‘तू रेंदी मां, तू रेहदी ऊंचा पहाड़ों मा’ और ‘मी पहाड़ों कु रैबासी, तू दिल्ली रौण वाली’ की प्रस्तुति से की। उनके गीतों ने पहाड़ की मिट्टी, भावनाओं और प्रवास की पीड़ा को जीवंत कर दिया।
लोकगायिका मंजू सुंदरियाल ने ‘कब आलू मंगसीर मैना’ और ‘मैना घस्यारी’ जैसे गीतों से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद गजेंद्र राणा ने अपने लोकप्रिय गीत ‘जय हो नंदा देवी, तेरी जय बोला’ और ‘बबली तेरो मोबाइल’ सहित अन्य गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया।
लोकगायिका रेशमा शाह ने महासू देवता की स्तुति और ‘चलो चारों धाम’ गीत से धार्मिक आस्था का रंग जमाया। वहीं, बिशन हरियाला ने ‘उत्तरायणी कौथिग’ और ‘पुष्पा लुकी रे’ गीत प्रस्तुत कर माहौल को उल्लासपूर्ण बना दिया।
सौरभ मैठाणी ने दोबारा मंच संभालते हुए ‘जख औंदी हवा सररर’, ‘बांज लखड़ू घास का ब्वारा’ और ‘सपना सयाली’ जैसे गीत सुनाए। बिशन हरियाला ने ‘गोरखा चेली भागुणी’ की प्रस्तुति दी। गजेंद्र राणा ने ‘हीरा समधानी’ और ‘नी रैयेन्दू मैसी, ढोंढा पड़िगे भैंसी’ जैसे गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का समापन रेशमा शाह ने ‘भूजि जाला चूड़ा’ और ‘जमीना को पाणी’ गीतों के साथ किया।
संगीत संगत में ऑर्गन पर मोहित जोशी, ढोलक पर सुमित गुसाईं, ढोल पर सुभाष पांडे, पैड पर सौरभ उपाध्याय, बांसुरी पर महेश और हुड़के पर प्रदीप पहाड़ी ने शानदार साथ दिया। कार्यक्रम का संचालन अजय जोशी ने किया। इस दौरान उदय शंकर भट्ट, गजेंद्र भंडारी, निर्मला बिष्ट, संतोष गैरोला, वीरेंद्र असवाल सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
सामूहिक गढ़वाली गीत प्रतियोगिता में सोशल बलूनी प्रथम
कौथिग में बुधवार सुबह 11 बजे विद्यालयों की सामूहिक गढ़वाली गीत प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों ने गढ़वाली लोकगीतों की प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगिता में सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल ने प्रथम, गुरु राम राय इंटरनेशनल स्कूल, रेसकोर्स ने द्वितीय और सारा देव इंटर कॉलेज ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायक मंडल में संगीता ढोंडियाल, संतोष खेतवाल और चंद्र दत्त सुयाल शामिल रहे।
स्वास्थ्य शिविर में 164 लोगों ने कराया परीक्षण
उत्तराखंड कौथिग स्थल पर हेल्थ नेटवर्किंग सेवा संस्थान और मैक्स अस्पताल के सहयोग से निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया। शिविर में कुल 164 लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिविर में पहुंचे लोगों में मधुमेह यानी शुगर की जांच कराने वालों की संख्या सर्वाधिक रही।
शिविर में डॉ. सिमरनजीत सिंह, डॉ. एसपी भट्ट, आभा शर्मा, प्रदीप कुमार, धर्मा राणा, संगीता और फरमान सहित अन्य लोगों ने सेवाएं दीं। सांस्कृतिक आयोजन के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की इस पहल को जनहित की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।




