Uttarakhand

डॉ. वाचस्पति मैठाणी की 77वीं जयंती पर सप्तम ऑनलाइन संस्कृत ज्ञान प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण प्रारम्भ”

* व्हाट्सएप एवं वेबसाइट के माध्यम से कर सकेंगे पंजीकरण
* पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे, युवा, एवं वरिष्ठ नागरिक कर सकेंगे प्रतिभाग
* देश-विदेश के सभी संस्कृत प्रेमियों को भी मिलेगा अवसर

देहरादून। संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों एवं नैतिक संस्कारों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से स्व. डॉ. वाचस्पति मैठाणी स्मृति मंच द्वारा “सप्तम अखिल भारतीय ऑनलाइन संस्कृतज्ञान प्रतियोगिता–2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित, पूर्व संस्कृत शिक्षा निदेशक, शिक्षाविद् एवं संस्कृत पुरुष स्वर्गीय डॉ. वाचस्पति मैठाणी की 77वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता हेतु ऑनलाइन पंजीकरण प्रारम्भ हो चुके हैं।

प्रतियोगिता के राष्ट्रीय संयोजक एवं संरक्षक मंडल सदस्य कैलाशपति मैठाणी ने बताया कि विगत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी देश-विदेश के संस्कृत प्रेमियों, छात्र-छात्राओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं प्रवासी भारतीयों को इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत भाषा एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पहले से अधिक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह प्रतियोगिता सभी आयु वर्गों के लिए आयोजित की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के अंतर्गत बाल संस्कार मांगलिक श्लोक गान (5–9 वर्ष), संस्कृत देशभक्ति गीत गान (10–16 वर्ष), प्रेरणादायक लघु कथा वाचन (17–25 वर्ष), भर्तृहरि रचित नीतिशतक श्लोक गान (26–50 वर्ष), स्तोत्र गान (51 वर्ष से अधिक आयु), संस्कृत गीत-नृत्य (9–13 एवं 14–18 वर्ष) तथा संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता (कक्षा 3–5, 6–8 एवं 9–12) का आयोजन किया जाएगा।

प्रतियोगिता की विशेषता यह है कि इसमें प्रतिभागियों को केवल प्रस्तुति देने का अवसर ही नहीं मिलेगा, बल्कि संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्रभक्ति से जुड़े विषयों का अध्ययन और अभ्यास करने का भी अवसर प्राप्त होगा। बाल संस्कार प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले संस्कृत मंत्रों एवं श्लोकों से परिचित कराया जाएगा, जबकि देशभक्ति गीत, नीतिशतक, स्तोत्र गान एवं संस्कृत नृत्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।

मैठाणी ने बताया कि प्रतिभागियों को संस्कृत में अपना परिचय देते हुए निर्धारित विषय पर वीडियो तैयार कर अपने आयु वर्ग के व्हाट्सएप समूह में भेजना होगा। गान एवं नृत्य प्रतियोगिताओं के लिए वीडियो की अवधि न्यूनतम 2 मिनट तथा अधिकतम 4 मिनट होगी, जबकि प्रेरणादायक लघु कथा वाचन के लिए न्यूनतम 3 मिनट एवं अधिकतम 5 मिनट की अवधि निर्धारित की गई है। ऑनलाइन पंजीकरण एवं व्हाट्सएप ग्रुप में वीडियो प्रेषण की तिथि 10 जून 2026 से 31 जुलाई 2026, रात्रि 10:00 बजे तक निर्धारित की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में 2 निर्णायकों द्वारा प्रस्तुति का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रतियोगिता को अधिक जनसहभागिता से जोड़ने के लिए फेसबुक पेज पर अपलोड की गई वीडियो पर प्राप्त दर्शक संख्या (Views) के आधार पर भी प्रतिभागियों को अधिकतम 20 अंक प्रदान किए जाएंगे। प्रतिभागी अपनी वीडियो को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाकर अतिरिक्त अंक अर्जित कर सकेंगे।

संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता 27 अगस्त 2026 को ऑनलाइन गूगल क्विज के माध्यम से आयोजित की जाएगी। इसमें कक्षा 3 से 12 तक के छात्र-छात्राएं भाग ले सकेंगे। प्रतियोगिता में संस्कृत भाषा, साहित्य, भारतीय संस्कृति, इतिहास, महापुरुषों, धर्मग्रंथों तथा ज्ञान-विज्ञान से संबंधित 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे।

प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा 28 अगस्त 2026 को स्व. डॉ. वाचस्पति मैठाणी की 77वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ऑनलाइन वेबीनार में की जाएगी। प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किए जाएंगे, जबकि चतुर्थ से दशम स्थान प्राप्त करने वालों सहित सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे तथा शेष सभी प्रतिभागियों को प्रतिभाग ई प्रमाण-पत्र प्रेषित किए जाएंगे।

प्रतियोगिता संबंधी विस्तृत नियमावली, पंजीकरण लिंक एवं अन्य जानकारी स्मृति मंच की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इच्छुक प्रतिभागी व्हाट्सएप नंबर 9412053129 पर “Hi” भेजकर भी प्रतियोगिता से संबंधित सभी लिंक एवं आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

संयोजक कैलाशपति मैठाणी ने देश-विदेश के सभी संस्कृत प्रेमियों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, संस्कृत संस्थानों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों से इस प्रतियोगिता में अधिकाधिक संख्या में प्रतिभाग करने की अपील की है, ताकि संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का यह अभियान जन-जन तक पहुँच सके।

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