Uttarakhand

सुनीता विलियम्स ने नासा से ली सेवानिवृत्ति

ह्यूस्टन — मानवीय सहनशक्ति और तकनीकी विशेषज्ञता के क्षितिज का विस्तार करने वाले 27 वर्षों के ऐतिहासिक करियर के बाद, भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स आधिकारिक तौर पर नासा (NASA) से सेवानिवृत्त हो गई हैं। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने मंगलवार, 20 जनवरी, 2026 को घोषणा की कि 60 वर्षीय दिग्गज अंतरिक्ष यात्री ने 27 दिसंबर, 2025 को अपनी सेवा समाप्त कर ली है।

यह घोषणा अंतरिक्ष अन्वेषण के एक उल्लेखनीय युग के अंत का प्रतीक है। विलियम्स, जिन्होंने 2024 में आठ दिनों की एक परीक्षण उड़ान को नौ महीने की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा में बदल दिया था, 608 दिनों के कक्षीय अनुभव के साथ सेवानिवृत्त हुई हैं—जो किसी भी नासा अंतरिक्ष यात्री द्वारा अंतरिक्ष में बिताया गया दूसरा सबसे अधिक समय है।

अंतिम मिशन: स्टारलाइनर और स्पेसएक्स का बचाव

विलियम्स की सेवानिवृत्ति मार्च 2025 में पृथ्वी पर उनकी वापसी के कुछ ही महीनों बाद हुई है। जून 2024 में, विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर ने बोइंग के CST-100 स्टारलाइनर की पहली चालक दल वाली परीक्षण उड़ान के पायलट और कमांडर के रूप में उड़ान भरी थी।

एक छोटा मिशन उस समय संकट में पड़ गया जब स्टारलाइनर कैप्सूल में हीलियम रिसाव और थ्रस्टर की खराबी पाई गई। नासा ने निर्णय लिया कि स्टारलाइनर पर वापसी बहुत जोखिम भरी होगी, जिसके कारण उनके प्रवास को अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बढ़ा दिया गया। अंततः वे मार्च 2025 में स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल के जरिए वापस लौटे।

सुनीता विलियम्स ने नासा द्वारा जारी एक बयान में कहा, “जो कोई भी मुझे जानता है, वह जानता है कि अंतरिक्ष मेरी सबसे पसंदीदा जगह है। अंतरिक्ष यात्री कार्यालय में सेवा करना और तीन बार अंतरिक्ष में उड़ान भरने का अवसर मिलना मेरे लिए एक अविश्वसनीय सम्मान रहा है। नासा में मेरा 27 साल का करियर अद्भुत रहा, और इसका मुख्य कारण मेरे सहकर्मियों से मिला प्यार और समर्थन है।”

रिकॉर्ड और लचीलेपन की मिसाल

सुनीता विलियम्स की विरासत केवल दिनों में नहीं, बल्कि उनके द्वारा स्थापित “प्रथम” उपलब्धियों और तकनीकी मील के पत्थरों से मापी जाती है।

  • कुल अंतरिक्ष समय: 608 दिन, नासा के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा रिकॉर्ड।

  • स्पेसवाक (Spacewalk) का दबदबा: नौ बार की सैर में 62 घंटे और 6 मिनट बिताकर, उनके पास एक महिला द्वारा सबसे अधिक कुल स्पेसवाकिंग समय का रिकॉर्ड है।

  • अंतरिक्ष में मैराथन: 2007 में, वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति बनीं।

  • बहुमुखी प्रतिभा: उन्होंने 40 से अधिक विभिन्न प्रकार के विमानों में 4,000 से अधिक उड़ान घंटे दर्ज किए हैं।

भविष्य को आकार देना: ISS से आर्टेमिस तक

भले ही विलियम्स अब उड़ान नहीं भरेंगी, लेकिन उनके योगदान ने अंतरिक्ष खोजकर्ताओं की अगली पीढ़ी के लिए आधार तैयार किया है। नासा प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने उन्हें एक “ट्रेलब्लेज़र” (पथप्रदर्शक) बताया, जिन्होंने चंद्रमा पर आर्टेमिस मिशन और मंगल की भविष्य की यात्रा के लिए आवश्यक प्रणालियों को प्रमाणित करने में मदद की।

सेवानिवृत्ति के बाद, विलियम्स ने भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने और उन्हें परामर्श देने की इच्छा व्यक्त की है। वर्तमान में वह भारत की यात्रा पर हैं, जहाँ उन्होंने नई दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में छात्रों से संवाद किया। उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने पर लोगों के बीच के अंतर छोटे लगने लगते हैं। यह वास्तव में आपको महसूस कराता है कि हम सब एक हैं।”

एक वैश्विक प्रेरणा

गुजरात के मेहसाणा जिले के एक न्यूरोएनाटॉमिस्ट डॉ. दीपक पंड्या की बेटी सुनीता विलियम्स की सफलता भारतीय प्रवासियों के लिए गर्व का विषय रही है। उन्होंने अक्सर अंतरिक्ष में भगवद गीता और समोसे जैसी सांस्कृतिक वस्तुएं ले जाकर अपनी जड़ों और वैज्ञानिक मिशन के मेल को दर्शाया।

उनकी सेवानिवृत्ति नासा के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत है, जहाँ एजेंसी वाणिज्यिक साझेदारियों (जैसे बोइंग और स्पेसएक्स) के साथ आगे बढ़ रही है। विलियम्स का करियर भविष्य के उन मिशनों के लिए एक प्रेरणा बना रहेगा जो हमें चंद्रमा और उससे आगे ले जाएंगे।

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